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Tum Ko Hum Dil Mein Basa To Lenge Tum Aao To Sahi.

तुमको हम दिल में बसा लेंगे, तुम आओ तो सही,
सारी दुनिया से छुपा लेंगे, तुम आओ तो सही ।

एक वादा करो अब हम से ना बिछड़ोगे कभी,
नाज़ हम सारे उठा लेंगे, तुम आओ तो सही ।

बेवफ़ा भी हो सितमगर भी जफ़ा पेशा भी,
हम ख़ुदा तुमको बना लेंगे, तुम आओ तो सही ।

राह तारीक़ है और दूर है मंज़िलें लेकिन,
दर्द की शम्मे जला लेंगे, तुम आओ तो सही ।
  • Mumtaz Mirza.
  • Chitra Singh.

Main Khayal Hoon Kisi Aur Ka Mujhe Sochta Koi Aur Hai.

मैं ख़याल हूँ किसी और का, मुझे सोचता कोई और है,
सर-ए-आईना मेरा अक्स है, पस-ए-आईना कोई और है ।

मैं किसी के दस्त-ए-तलब में हूँ, तो किसी के हर्फ़-ए-दुआ में हूँ,
मैं नसीब हूँ किसी और का, मुझे माँगता कोई और है ।

तुझे दुश्मनो की ख़बर ना थी, मुझे दोस्तों का पता ना था,
तेरी दास्तान कोई और थी, मेरा वाक़िया कोई और है ।
  • Saleem Kausar.
  • Jagjit Singh.

Safar Mein Dhoop To Hogi Jo Chal Sako To Chalo.

सफ़र में धूप तो होगी, जो चल सको तो चलो,
सभी हैं भीड़ में तुम भी, निकल सको तो चलो ।

किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती है,
तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो ।

यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता,
मुझे गिरा के अगर तुम सम्भल सको तो चलो ।

यही है ज़िन्दगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें,
इन्हीं खिलौनो से तुम भी बहल सको तो चलो ।
  • Nida Fazli.
  • Chitra Singh.

Meri Jawani Dede Dene Waale Mujhe Mauzon Ki Ravanii.

देने वाले मुझे मोज़ो की रवानी दे दे,
फिर से एक बार मुझे मेरी जवानी दे दे ।

अब्र हो जाम हो साक़ी हो मेरे पहलू में,
कोई तो शाम मुझे ऐसी सुहानी दे दे ।

नशा आ जाए मुझे तेरी जवानी की कसम,
तु अगर जाम में भर के मुझे पानी दे दे ।

हर जवाँ दिल मेरे अफ़साने को दोहराता रहे,
हश्र तक ख़त्म ना हो ऐसी कहानी दे दे ।
  • Shadaab Lahori.
  • Jagjit Singh.

Aap Ko Bhool Jayein Hum Itne To Bewafaa Nahi.

आप को भूल जायें हम इतने तो बेवफ़ा नहीं,
आपसे क्या गिला करें आपसे कुछ गिला नहीं ।

शीशा-ए-दिल को तोड़ना उनका तो एक खेल है,
हमसे ही भूल हो गयी उनकी कोई ख़ता नहीं ।

काश वो अपने ग़म मुझे दे दे तो कुछ सुकुन मिले,
वो कितना बद-नसीब है ग़म ही जिसे मिला नहीं ।

जुर्म है अगर वफ़ा तो क्या क्यूँ मैं वफ़ा को छोड़ दूँ,
कहते हैं इस गुनाह की होती कोई सज़ा नहीं ।
  • Tasleem Fazli.
  • Chitra Singh.

Sholaa Hoon Bhadakne Kii Guzaarish Nahi Karta.

शोला हूँ भड़कने की गुज़ारिश नहीं करता,
सच मुँह से निकल जाता है कोशिश नहीं करता ।

गिरती हुई दिवार का हमदर्द हूँ लेकिन,
चढ़ते हुए सूरज की परस्तिश नहीं करता ।

माथे के पसीने कि महक आए न जिससे,
वो ख़ून मेरे जिस्म में गर्दीश नहीं करता ।

हमदर्द तेरे एहबाब से डरता हूँ ' मुज़फ़्फ़र ',
मैं ज़ख्म तो रखता हूँ नुमाईश नहीं करता ।
  • Muzaffar Warsi.
  • Jagjit Singh.

Shaayad, Phir Usi Raahguzar Par Shaayad.

फिर उसी राहगुज़र पर शायद,
हम कभी मिल सकें मगर शायद ।

जान पहचान से ही क्या होगा,
फिर भी ऐ दोस्त गौर कर शायद ।

मुन्तज़िर जिनके हम रहे उन को,
मिल गए और हमसफ़र शायद ।

जो भी बिछड़े हैं कब मिले हैं ' फ़राज़ ' ,
फिर भी तू इंतज़ार कर शायद ।
  • Ahmed Faraz.
  • Jagjit Singh.

Main Chahta Bhi Yahi Tha Wo Bewafaa Nikale.

मैं चाहता भी यही था वो बेवफ़ा निकले,
उसे समझने का कोई तो सिलसिला निकले ।

किताब-ए-माज़ी के पन्ने उलट के देख ज़रा,
न जाने कौन सा पन्ना मुड़ा हुआ निकले ।

किताब-ए-माज़ी की औराक़ उलट के देख ज़रा,
न जाने कौन सा सफ़हा मुड़ा हुआ निकले ।

जो देखने में बहुत ही करीब लगता है,
उसी के बारे में सोचो तो फ़ासिला निकले ।
  • Waseem Barelvii.
  • Jagjit Singh.

Maana Ke Musht-E-Khak Se Badhkar Nahi Hoon Main.

माना के मुश्त-ए-ख़ाक से बढ़कर नहीं हूँ मैं,
लेकिन हवा के रहम-ओ-करम पर नहीं हूँ मैं ।

इन्सान हूँ धड़कते हुए दिल पे हाथ रख,
यूँ डूब कर न देख समन्दर नहीं हूँ मैं ।

चेहरे पे मल रहा हूँ सियाही नसीब की,
आईना हाथ में है सिकन्दर नहीं हूँ मैं ।

'ग़ालिब' तेरी ज़मीन में लिखी तो है ग़ज़ल,
तेरे कद-ए-सुखन के बराबर नहीं हूँ मैं ।
  • Muzaffar Warsi.
  • Jagjit Singh.

Aisaa Lagta Hai Zindagi Tum Ho Ajnabi Kaise Ajnabi.

ऐसा लगता है ज़िन्दगी तुम हो,
अजनबी कैसे अजनबी तुम हो ।

अब कोई आरज़ू नहीं बाकी,
जुस्तजू मेरी आख़री तुम हो ।

मैं ज़मीन पर घना अँधेरा हूँ,
आसमानों की चाँदनी तुम हो ।

दोस्तों से वफ़ा की उम्मीदें,
किस ज़माने के आदमी तुम हो ।
  • Bashir Badr.
  • Chitra Singh.

Huzoor Aapka Bhi Ehtram Karta Chaloon Idhar Se.

हुज़ूर आपका भी एह्तराम करता चलूँ,
इधर से गुज़रा था सोचा सलाम करता चलूँ ।

निगाह-ओ-दिल की यही आखिरी तमन्ना है,
तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साये मे शाम करता चलूँ ।

उन्हें ये ज़िद कि मुझे देखकर किसी को ना देख,
मेरा ये शौक़ कि सबसे कलाम करता चलूँ ।

ये मेरे ख़्वाबों की दुनिया नहीं सही लेकिन,
अब आ गया हूँ तो दो दिन क़याम करता चलूँ ।
  • Shadaab Lahori.
  • Jagjit Singh.