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Woh Nahin Milta Mujhe Iska Gila Apni Jagah Uske Mere.

वो नहीं मिलता मुझे इसका गिला अपनी जगह,
उसके मेरे दरमियाँ का फ़ासिला अपनी जगह ।

ज़िन्दगी के इस सफ़र में सैकड़ों चेहरे मिले,
दिल-कशी उनकी अलग पैकर तेरा अपनी जगह ।

तुझसे मिल कर आने वाले कल से नफ़रत मोल ली,
अब कभी तुझसे ना बिछडूँ ये दुआ अपनी जगह ।

एक मुसलसल दौड़ में है मंज़िलें और फ़ासिले,
पाँव तो अपनी जगह है रास्ता अपनी जगह ।
  • Iftikar Imam Siddiqi.
  • Chitra Singh.

Meri Tanhaiyo Tum Hi Laga Lo MujhKo Seene Se.

मेरी तन्हाईयों तुम ही लगा लो मुझको सीने से,
कि मैं घबरा गया हूँ इस तरह रो रो के जीने से ।

ये आधी रात को फिर चूड़ियों सा क्या खनकता है,
कोई आता है या मेरी ही ज़ंज़ीर खनकती है,
ये बातें किस तरह पूछूँ मैं सावन के महीने से ।

मुझे पीने दो अपने ही लहू का जाम पीने दो,
ना सीने दो किसी को भी मेरा दामन ना सीने दो,
मेरी वहशत ना बढ जाए कहीं दामन के सीने से ।
  • Prem Warbartni.
  • Jagjit Singh.

Kaun Kehta Hai Mohabbat Ki Zubaan Hoti Hai.

कौन कहता है मोहब्बत की जुबाँ होती है,
ये हक़ीक़त तो निगाहों से बयाँ होती है ।

वो ना आए तो सताती है ख़लिश दिल को,
वो जो आए तो ख़लिश और जवाँ होती है ।

रूह को शाद करें दिल को जो पुर-नूर करे,
हर नज़ारे में ये तनवीर कहाँ होती है ।

ज़ब्त-ए-सैलाब-ए-मोहब्बत को कहाँ तक रोके,
दिल में जो बात हो आँखों से अयाँ होती है ।

ज़िन्दगी एक सुलगती सी चिता है ‘साहिर’,
शोला बनती है ना ये बुझ के धुँआ होती है ।
  • Sahir Hoshiyarpuri.
  • Chitra - Jagjit Singh.

Ishq Mein Gairat-E-Jazbaat Ne Rone Na Diya.

इश्क में ग़ैरते-जज़्बात ने रोने ना दिया,
वरना क्या बात थी किस बात ने रोने ना दिया ।

यार को मैनें मुझे यार ने सोने ना दिया,
रात भर ताले-बेदार ने सोने ना दिया ।

आप कहते थे के रोने से ना बदलेंगे नसीब,
उम्र भर आपकी इस बात ने रोने ना दिया ।

एक शब बुलबुले-बेताब के जागे ना नसीब,
पहलू-ए-गुल में कभी ख़ार ने सोने ना दिया ।

उनसे मिलकर हमें रोना था बहुत रोना था,
तन्गी-ए-वक़्त-ए-मुलाक़ात ने रोने ना दिया ।

रात भर की दिले-बेताब ने बातें मुझसे,
रंजो-मेहनत के गिरफ़्तार ने सोने ना दिया ।

रोने वालों से कहो उनका भी रोना रो लें,
जिनको मजबूर-ए-हालात ने रोने ना दिया ।
  • Sudarshan Faakir.
  • Khwaja Haider Ali Aatish.
  • Chitra - Jagjit Singh.

Duniya Jise Kehte Hain Jadoo Ka Khilona Hai Mil Jaaye.

दुनिया जिसे कहते हैं जादू का ख़िलौना है,
मिल जाए तो मिट्टी है खो जाए तो सोना है ।

अच्छा सा कोई मौसम तन्हा सा कोई आलम,
हर वक़्त का रोना तो बेकार का रोना है ।

बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने,
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है ।

ग़म हो कि ख़ुशी दोनो कुछ देर के साथी हैं,
फिर रस्ता ही रस्ता है हँसना है ना रोना है ।
  • Nida Faazli.
  • Chitra - Jagjit Singh.

Dhai Din Na Jawani Naal Chaldi Kurti Mal Mal Di.

Punjabi Track.
Dhai Din Na Jawani Naal Chaldi Kurti Mal Mal Di....

  • Inderjeet Hassanpuri.
  • Jagjit Singh.

Charkha Mera Rangla Wich Sone Diya Maika.

Punjabi Track.
Charkha Mera Rangla Wich Sone Diya Maika....

  • Inderjeet Hassanpuri.
  • Chitra Singh.

Koi Paas Aaya Sawere Sawere Mujhe Aazmaaya.

कोई पास आया सवेरे सवेरे,
मुझे आज़माया सवेरे सवेरे ।

मेरी दास्तां को ज़रा सा बदल कर,
मुझे ही सुनाया सवेरे सवेरे ।

जो कहता था कल शब संभलना संभलना,
वही लड़खड़ाया सवेरे सवेरे ।

कटी रात सारी मेरी मयक़दे में,
ख़ुदा याद आया सवेरे सवेरे ।
  • Saeed Rahi.
  • Jagjit Singh.

Jab Kabhi Tera Naam Lete Hain Dil Se Hum Intekaam.

जब कभी तेरा नाम लेते हैं,
दिल से हम इन्तक़ाम लेते हैं ।

मेरी बर्बादीयों के अफ़साने,
मेरे यारों के नाम लेते हैं ।

बस यही एक जुर्म है अपना,
हम मोहब्बत से काम लेते हैं ।

हर क़दम पर गिरे मगर सीखा,
कैसे गिरतों को थाम लेते हैं ।

हम भटककर जुनूँ की राहों में,
अक़्ल से इन्तक़ाम लेते हैं ।
  • Sardar Anjum.
  • Chitra - Jagjit Singh.

Har Soo Dikhai Dete Hain Wo Jalwagar Mujhe.

हर सू दिखाई देते हैं वो जलवागर मुझे,
क्या-क्या फ़रेब देती है मेरी नज़र मुझे ।

ड़ाला है बेख़ुदी ने अजब राह पर मुझे,
आँखें हैं और कुछ नहीं आता नज़र मुझे ।

दिल ले के मेरा देते हो दाग़-ए-जिगर मुझे,
ये बात भूलने की नहीं उम्र भर मुझे ।

आया ना रास नाला-ए-दिल का असर मुझे,
अब तुम मिले तो कुछ नहीं अपनी ख़बर मुझे ।
  • Jigar Moradabadi.
  • Chitra Singh.

Tum Nahin Gham Nahin Sharab Nahin Aisi Tanhaii Ka.

तुम नहीं ग़म नहीं शराब नहीं,
ऐसी तन्हाई का जवाब नहीं ।

गाहे-गाहे इसे पढ़ा कीजे,
दिल से बेहतर कोई किताब नहीं ।

जाने किस किस की मौत आयी है,
आज रुख़ पर कोई नक़ाब नहीं ।

वो करम उन्गलियों पे गिनते हैं,
ज़ुल्म का जिनके कुछ हिसाब नहीं ।

  • Saeed Rahi.
  • Jagjit Singh.

Sarakti Jaye Hai Rukh Se Naqab Aahista Aahista.

सरकती जाये है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता,
निकलता आ रहा है आफ़ताब आहिस्ता आहिस्ता ।

जवां होने लगे जब वो तो हमसे कर लिया पर्दा,
हया यक़लख़्त आई और शबाब आहिस्ता आहिस्ता ।

सवाल-ए-वस्ल पे उनको उदू का खौफ़ है इतना,
दबे होंठों से देते हैं जवाब आहिस्ता आहिस्ता ।

हमारे और तुम्हारे प्यार में बस फ़र्क है इतना,
इधर तो जल्दी-जल्दी है उधर आहिस्ता आहिस्ता ।

शब-ए-फ़ुर्क़त का जागा हूँ फ़रिश्तों अब तो सोने दो,
कभी फ़ुर्सत में कर लेना हिसाब आहिस्ता आहिस्ता ।

वो बेदर्दी से सर काटें ‘अमीर’ और मैं कहूँ उनसे,
हुज़ूर आहिस्ता आहिस्ता जनाब आहिस्ता आहिस्ता ।
  • Ameer Meenai.
  • Jagjit Singh.