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Ye To Nahin Ke Gham Nahin.

ये तो नही के ग़म नही,
हाँ मेरी आँख नम नहीं ।

तुम भी तो तुम नहीं हो आज,
हम भी तो आज हम नहीं ।

अब न खुशी की है खुशी,
ग़म का भी अब तो ग़म नहीं ।

मौत अगर चे-मौत है,
मौत से ज़ीस्त कम नहीं ।
  • Firaq Gorakhpuri.
  • Chitra Singh.

Teri Khushboo Mein Base Khat Main Jalata Kaise.

तेरे खुश्बू में बसे ख़त मैं जलाता कैसे,
प्यार में डूबे हुए ख़त मैं जलाता कैसे,
तेरे हाथों के लिखे ख़त मैं जलाता कैसे ।

जिनको दुनिया की निगाहों से छुपाए रखा,
जिनको इक उम्र कलेजे से लगाए रखा,
दीन जिनको जिन्हें ईमान बनाए रखा ।

जिनका हर लफ्ज़ मुझे याद था पानी की तरह,
याद थे मुझको जो पैग़ाम-ए-ज़ुबानी की तरह,
मुझको प्यारे थे जो अनमोल निशानी की तरह ।

तूने दुनिया की निगाहों से जो बचकर लिखे,
साल-हा-साल मेरे नाम बराबर लिखे,
कभी दिन में तो कभी रात को उठकर लिखे ।

तेरे ख़त आज मैं गंगा में बहा आया हूँ,
आग बहते हुए पानी में लगा आया हूँ ।
  • Rajendranath Rehbar.
  • Jagjit Singh.

Socha Nahi Achha Bura Dekha Suna Kuch Bhi Nahi.

सोचा नहीं अच्छा-बुरा देखा-सुना कुछ भी नहीं,
मांगा खुदा से रात-दिन तेरे सिवा कुछ भी नहीं ।

देखा तुझे सोचा तुझे चाहा तुझे पूजा तुझे,
मेरी ख़ता मेरी वफ़ा तेरी खता कुछ भी नहीं ।

जिस पर हमारी आँख ने मोती बिछाये रात-भर,
भेजा उन्हें कागज़ वो ही लिखा मगर कुछ भी नहीं ।

एक शाम की दहलीज़ पर बैठे रहे वो देर तक,
आँखों से की बातें बहुत मुंह से कहा कुछ भी नहीं ।
  • Bashir Badr.
  • Chitra - Jagjit Singh.

Manzil Na De Chiraag Na De Hausla To De.

मंज़िल न दे चराग़ न दे हौसला तो दे,
तिनके का ही सही तू मगर आसरा तो दे ।

मैंने ये कब कहा के मेरे हक़ में हो जवाब,
लेकिन खामोश क्यूँ है तू कोई फ़ैसला तो दे ।

बरसों मैं तेरे नाम पे खाता रहा फ़रेब,
मेरे खुदा कहाँ है तू अपना पता तो दे ।

बेशक़ मेरे नसीब पे रख अपना इख़्तियार,
लेकिन मेरे नसीब में क्या है बता तो दे ।

  • Rana Sahri.
  • Chitra - Jagjit Singh.

Kabhi To Khul Ke Baras Abr-E-Meherbaan Ki Tarah.

कभी तो खुल के बरस अब्र-ए-मेहरबां की तरह,
मेरा वज़ूद है जलते हुए मकां की तरह ।

मैं इक ख़्वाब सही आपकी अमानत हूँ,
मुझे सम्भाल के रखियेगा जिस्म-ओ-जां की तरह ।

कभी तो सोच के वो शख़्स किस क़दर त बुलंद,
जो बिछ गया तेरे क़दमों में आसमां की तरह ।

बुला रहा है मुझे फ़िर किसी बदन का बसन्त,
गुज़र न जाये ये रुत भी कहीं खिज़ां की तरह ।
  • Prem Warbartni.
  • Chitra Singh.

Kabhi Ghuncha Kabhi Shola Kabhi Shabnam Ki Tarah.

कभी गुंचा कभी शोला कभी शबनम की तरह,
लोग मिलते हैं बदलते हुए मौसम की तरह ।

मेरे महबूब मेरे प्यार को इल्ज़ाम न दे,
हिज्र में ईद मनाई है मोहर्रम की तरह ।

मैंने खुश्बू की तरह तुझको किया है मह्सूस,
दिल ने छेड़ा है तेरी याद को शबनम की तरह ।

कैसे हम-दर्द हो तुम कैसी मसीहाई है,
दिल पे नश्तर भी लगाते हो तो मर्हम की तरह ।
  • Rana Sahri.
  • Jagjit Singh.

Aye Khuda Ret Ke Sehra Ko Samandar Kar De.

ऐ ख़ुदा रेत के सेहरा को समंदर कर दे,
या छलकती हुई आँखों को भी पत्थर कर दे ।

तुझको देखा नहीं महसूस किया है मैंने,
आ किसी दिन मेरे एहसास को पैकर कर दे ।

और कुछ भी मुझे दरकार नहीं है लेकिन,
मेरी चादर मेरे पैरों के बराबर कर दे ।
  • Shahid Meer.
  • Jagjit Singh.

Aankh Se Aankh Mila Baat Banata Kyun Hai.

आँख से आँख मिला बात बनाता क्यूं है,
तू अगर मुझसे खफ़ा है तो छुपाता क्यूं है ।

ग़ैर लगता है न अपनो की तरह मिलता है,
तू ज़माने की तरह मुझको सताता क्यूं है ।

वक़्त के साथ ख़यालात बदल जाते हैं,
ये हक़ीक़त है मगर मुझको सुनाता क्यूं है ।

एक मुद्दत से जहां क़ाफ़िले गुज़रे ही नहीं,
ऐसी राहों पे चरागों को जलाता क्यूं है ।
  • Saeed Rahi.
  • Chitra Singh.