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रंगों का रस्ता, चंदन का जंगल, मस्ती की बारिश, ज़ुल्फ़ों का बादल,आँखों में रंगीं, सपनो की मखमल, सांसों में गर्मी, सीने में हलचल ।कोमल सी बाहें, शीशे की चूड़ी, माथे पे बिन्दीया, आँखों में काजल,कजरारे नैना, प्यासी है रैना, ये तेरा चेहरा, सूरज की छागल ।बूंदों पे मोती, गीतो की शबनम, पैरो में हंसती, हल्की सी पायल,हल्की सी पायल, थोड़ी सी कसती, थोड़ी सी चंचल, थोड़ी सी पागल ।- Chitra Singh - Ghanshyam Waswani .
नींद के गाँव में आज यादों का बाज़ार है,खिलखिलाते हुए अपना दामन उठाते हुए,बच्चों के पाँव की धूल का कारवाँ,गाँव की हर गली अपने पैरों की ज़ंजीर है,गाँव का हर मकान अपने रस्ते की दीवार है,नींद के गाँव में आज यादों का बाज़ार है ।एक अँगोछा लपेटे हुए वक़्त बैठा है दहलीज़ पर,बांस के झुण्ड़ से बचके चलती रहगुज़र,वो गली के किनारे पर बैठी वज़ू करती,मस्जि़द की एक मिनार पर, कब की अटकी हुई एक अज़ान,जिसका सन्नाटा तलवार की धार है,नींद के गाँव में आज यादों का बाज़ार है ।मैं भी बरगद के साये में बैठी हुई,अपनी यादों की परछाईयाँ बेच दो,मेरे लफ्ज़ों में है उस उदासी कहानी का रस,जिसपे चलता न था कच्चे आँगन का बस,निमकीयों के कड़े सख़्त लड़े, जो न जाने थे किसके लिए,आज भी किस कदर याद है,नींद के गाँव में आज यादों का बाज़ार है ।
हमसफ़र होता कोई तो बाँट लेटे दूरीयाँ,
राह चलते लोग क्या समझे मेरी मजबूरीयाँ ।
मुस्कुराते ख़्वाब चुनती गुन-गुनाती ये नज़र,
किस तरह समझे मेरी क़िस्मत की ना-मंज़ूरीयाँ ।
हादसों की भीड़ है चलता हुआ ये कारवाँ,
ज़िन्दगी का नाम है लाचारीयाँ मजबूरीयाँ ।
फिर किसी ने आज छेड़ा ज़िक्र-ए-मन्ज़िल इस तरह,
दिल के दामन से लिपटने आ गयी हैं दूरीयाँ ।
- Sardar Anjum.
- Jagjit Singh.
हम तो हैं परदेस में देश में निकला होगा चाँद,
अपनी रात की छत पर कितना तन्हा होगा चाँद ।
जिन आँखों में काजल बनकर तैरी काली रात,
उन आँखों में आँसू का इक कतरा होगा चाँद ।
रात ने ऐसा पेच लगाया टूटी हाथ से डोर,
आँगन वाले नीम में जाकर अटका होगा चाँद ।
चाँद बिना हर दिन यूँ बीता जैसे युग बीते,
मेरे बिना किस हाल में होगा कैसा होगा चाँद ।
- Rahi Masoom Reza.
- Chitra - Jagjit Singh.
- Jagjit Singh.
दिल के उजले कागज़ पर हम कैसा गीत लिखें,
बोलो तुमको ग़ैर लिखें या अपना मीत लिखें ।
नीले अम्बर की अँगनाई में तारों के फूल,
मेरे प्यासे होटों पर है अंगारों के फूल,
इन फूलों को आख़िर अपनी हार या जीत लिखें,
बोलो तुमको ग़ैर लिखें या अपना मीत लिखें ।
कोई पुराना सपना दे दो और कुछ मीठे बोल,
लेकर हम निकले हैं अपनी आँखों के कश खोल,
हम बंजारे प्रीत के मारे क्या संगीत लिखें,
बोलो तुमको ग़ैर लिखें या अपना मीत लिखें ।
शाम खड़ी है एक चमेली के प्याले में शबनम,
जमुना जी की ऊंगली पकड़े खेल रहा है मधुबन,
ऐसे में गंगा जल से राधा की प्रीत लिखें,
बोलो तुमको ग़ैर लिखें या अपना मीत लिखें ।
- Rahi Masoom Reza.
- Chitra Singh.