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Mere Qareeb Na Aao Ke Main Sharaabi Hoon.

मेरे क़रीब ना आओ के मैं शराबी हूँ,
मेरा शऊफ़ जगाओ के मैं शराबी हूँ ।

ज़माने भर की निगाहों से गिर चुका हूँ मैं,
नज़र से तुम ना गिराओ के मैं शराबी हूँ ।

ये अर्ज़ करता हूँ गिर के ख़ुलुस वालो से,
उठा सको तो उठाओ के मैं शराबी हूँ ।

तुम्हारी आँख से भर लूँ सुरूर आँखों में,
नज़र नज़र से मिलाओ के मैं शराबी हूँ ।
  • Saba Sikri.
  • Jagjit Singh.

Uski Baatein Bahar Kii Baatein Waadi-E-Laalazar Kii.

उसकी बातें बहार की बातें,
वादि-ए-लालज़ार की बातें ।

गुलो-शबनम का ज़िक्र कर ना अभी,
मुझको करनी है यार की बातें ।

शेख़जी मैक़दा है क़ाबा नहीं,
यहाँ तो होगी खुमार की बातें ।

इश्क़ का कारवाँ चला भी नहीं,
और अभी से गुबार की बातें ।

ये क़फ़स और तेरा ख़याले-हसीन,
उस पे हरसू बहार की बातें ।

  • Saeed Rahi.
  • Chitra - Jagjit Singh.

Sar Jhukaoge To Patthar Devta Ho Jayega Itna Mat.

सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा,
इतना मत चाहो उसे वो बेवफ़ा हो जाएगा ।

हम भी दरीया है हमें अपना हुनर मालूम है,
जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा ।

मैं खुदा का नाम लेकर पी रहा हूँ दोस्तों,
ज़हर भी इसमें अगर होगा दवा हो जाएगा ।

रूठ जाना तो मोहब्बत की अलामत है मगर,
क्या ख़बर भी मुझसे वो इतना ख़फ़ा हो जाएगा ।
  • Bashir Badr.
  • Jagjit Singh.

Nazar Nazar Se Milaa Kar Sharab Peete Hain.

नज़र नज़र से मिलाकर शराब पीते हैं,
हम उनको पास बिठाकर शराब पीते हैं ।

इसीलिये तो अँधेरा है मयकदे में बहुत,
यहाँ घरों को जलाकर शराब पीते हैं ।

हमें तुम्हारे सिवा कुछ नज़र नहीं आता,
तुम्हें नज़र में सजाकर शराब पीते हैं ।

उन्हीं के हिस्से आती है प्यास ही अक्सर,
जो दूसरों को पिलाकर शराब पीते हैं ।
  • Tasneem Faaruqi.
  • Jagjit Singh.

Garaj Baras Pyaasi Dharti Par Phir Paani De Maula.

गरज बरस प्यासी धरती पर फिर पानी दे मौला,
चिड़ीयों को दाने बच्चों को गुड़-धानी दे मौला ।

दो और दो का जोड़ हमेशा चार कहाँ होता है,
सोच समझ वालों को थोड़ी नादानी दे मौला ।

फिर रोशन कर ज़हर का प्याला चमका नयी सलिबें,
झूठों कि दुनिया में सच को ताबानी दे मौला ।

फिर मुरत से बाहर आकर चारों ओर बिखर जा,
फिर मंदिर को कोई मीरा दीवानी दे मौला ।

तेरे होते कोई किसी की जान का दुश्मन क्यूँ,
जीने वालों को मरने की आसानी दे मौला ।
  • Nida Fazli.
  • Jagjit Singh.

Din Aa Gaye Shabab Ke Aanchal Sambhaliye Hone Lagi.

दिन आ गये शबाब के आँचल सम्भालिये,
होने लगी है शहर में हलचल सम्भालिये ।

चलिये सम्भल सम्भल के कठीन राह-ए-इश्क़ है,
नाज़ुक बड़ी है आपकी पायल सम्भालिये ।

सज-धज के आप निकले सर-ए-राह ख़ैर हो,
टकरा ना जाए आपका पागल सम्भालिये ।

घर से ना जाओ दूर किसी अजनबी के साथ,
बरसेंगे जोर-शोर से बादल सम्भालिये ।
  • Madanpal.
  • Jagjit Singh.

Tera Chehra Kitna Suhana Lagta Hai Tere Aage Chand.

तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है,
तेरे आगे चाँद पुराना लगता है ।

तिरछे तिरछे तीर नज़र के आते हैं,
सीधा सीधा दिल पे निशाना लगता हैं ।

आग का क्या है पल दो पल में लगती है,
बुझते बुझते एक ज़माना लगता है ।

माशुक का बुढ़ापा लज़्ज़त दिला रहा है,
अंगुर का मज़ा अब किशमिश में आ रहा है ।

सच तो ये है फूल का दिल भी छलनी है,
हँसता चेहरा एक बहाना लगता है ।

तुझसे मिलके ईमली मिठी लगती है,
तुझसे बिछड़ के शहद भी खारा लगता है ।
तेरे आगे चाँद बेचारा लगता है ।
  • Kaif Bhopali.
  • Jagjit Singh.

Kaun Aayega Yahan Koi Na Aaya Hoga Mera Darwaza.

कौन आयेगा यहाँ कोई ना आया होगा,
मेरा दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा ।

दिल-ए-नादां ना धड़क ऐ दिल-ए-नादां ना धड़क,
कोई ख़त ले के पड़ोसी के घर आया होगा ।

गुल से लिपटी हुई तितली को गिराकर देखो,
आँधियों तुमने दरख़्तों को गिराया होगा ।

‘कैफ़’ परदेस में मत याद करो अपना मकां,
अब के बारिश ने उसे तोड़ गिराया होगा ।
  • Kaif Bhopali.
  • Jagjit Singh.

Neend Ke Gaoon Mein Aaj Yaadon Ka Baazaar Hai.

नींद के गाँव में आज यादों का बाज़ार है,

खिलखिलाते हुए अपना दामन उठाते हुए,
बच्चों के पाँव की धूल का कारवाँ,
गाँव की हर गली अपने पैरों की ज़ंजीर है,
गाँव का हर मकान अपने रस्ते की दीवार है,
नींद के गाँव में आज यादों का बाज़ार है ।

एक अँगोछा लपेटे हुए वक़्त बैठा है दहलीज़ पर,
बांस के झुण्ड़ से बचके चलती रहगुज़र,
वो गली के किनारे पर बैठी वज़ू करती,
मस्जि़द की एक मिनार पर,
कब की अटकी हुई एक अज़ान,
जिसका सन्नाटा तलवार की धार है,
नींद के गाँव में आज यादों का बाज़ार है ।

मैं भी बरगद के साये में बैठी हुई,
अपनी यादों की परछाईयाँ बेच दो,
मेरे लफ्ज़ों में है उस उदासी कहानी का रस,
जिसपे चलता न था कच्चे आँगन का बस,
निमकीयों के कड़े सख़्त लड़े,
जो न जाने थे किसके लिए,
आज भी किस कदर याद है,
नींद के गाँव में आज यादों का बाज़ार है ।
  • Jagjit Singh.

Hum To Hain Pardes Mein Des Mein Nikla Hoga.

हम तो हैं परदेस में देश में निकला होगा चाँद,
अपनी रात की छत पर कितना तन्हा होगा चाँद ।

जिन आँखों में काजल बनकर तैरी काली रात,
उन आँखों में आँसू का इक कतरा होगा चाँद ।

रात ने ऐसा पेच लगाया टूटी हाथ से डोर,
आँगन वाले नीम में जाकर अटका होगा चाँद ।

चाँद बिना हर दिन यूँ बीता जैसे युग बीते,
मेरे बिना किस हाल में होगा कैसा होगा चाँद ।
  • Rahi Masoom Reza.
  • Chitra - Jagjit Singh.
  • Jagjit Singh.