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प्रभुजी तुम चन्दन हम पानी, जाकी अंग अंग बास समानि |प्रभुजी तुम घन बन हम मोरा, जैसे चितवत चन्द चकोरा |प्रभुजी तुम दीपक हम बाती, जाकी जोति बरै दिन राती |प्रभुजी तुम मोती हम धागा, जैसे सोने मिलत सुहागा |प्रभुजी तुम स्वामी हम दासा, ऐसी भक्ति करै रैदासा | - Raidaas. (Sant Ravidaas.)
- Chitra Singh.
मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरा ना कोई,मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरा ना कोई ।भाई छोड़या, बन्धु छोड़या, छोड़या सगा सोई,साधु संग बैठ बैठ, लोक लाज खोई रे ।भगत देख राजी होई, जगत देख रोई,असुवन जल सींच सींच, प्रेम बेल बोई रे ।अब तो बात फैल पड़ी, जाने सब कोई,मीरा एव लगन लगी, होनी हो सो होई रे ।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे,हरे रामा हरे रामा, रामा रामा हरे हरे ।
लाज राखो गिरधारी,जैसी लाज राखी अर्जुन की,भारत युद्ध पछारी,सारथी हो के रथ को हाक्यो,चक्र सुदर्शन धारी,भक्त की टेक ना टारी ।जैसी लाज राखी द्रौपदी की,होन ना दीनी उगारी,खेचत खेचत दो भुज ठाके,दुशाशन पछारी,चीर बढ़ायो मुरारी ।सूरदास की लाज राखो प्रभु,अब कोहे रखवारी,राधे राधे श्रीवर प्यारो,श्री वृषभान दुलारी,शरण में आयो तुम्हारी ।
बीत गये दिन भजन बिना रे ।भजन बिना रे, भजन बिना रे ॥बाल अवस्था खेल गवांयो ।जब यौवन तब मान घना रे ॥लाहे कारण मूल गवाँयो ।अजहुं न गयी मन की तृष्णा रे ॥कहत कबीर सुनो भई साधो ।पार उतर गये संत जना रे ॥
मुरलीया बाजे रे, जमुना के तीर,
जमुना के तीर हो, जमुना के तीर ।
मुरली की धुन मेरो मन हर लिनो,
चित धरत नहीं धीर ।
कारो कन्हैया कारी कमरीया,
कारो जमुना को नीर ।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर,
चरण कमल पग सीर ।
हे राम, हे राम,
जग में सचो तेरो नाम ॥ हे राम, हे राम ॥
तु ही माता, तु ही पिता है,
तु ही तो है राधा का श्याम ॥ हे राम, हे राम ॥
तु अंतरयामी सबका स्वामी,
तेरे चरणो में चारो धाम ॥ हे राम, हे राम ॥
तु ही बिगाड़े तु ही सँवारे,
इस जग के सारे काम ॥ हे राम, हे राम ॥
तु ही जग दाता विश्व विधाता,
तु ही सुबह, तु ही शाम ॥ हे राम, हे राम ॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे,
हरे रामा हरे रामा, रामा रामा हरे हरे ।
- Sudarshan Faakir.
- Jagjit Singh.
सबसे ऊँची प्रेम सगाई, सबसे ऊँची प्रेम सगाई ॥
दुर्योधन को मेवा त्याग्यो, साग बिदुर घर पाई ॥
झूठे फल सबरी के खाए, बहु बिद प्रेम लगाई ॥
प्रेम के बस अर्जुन रथ हांक्यो, भूल गए ठकुराई ॥
ऐसी प्रीत बढ़ी वृन्दावन, गोपीन नाच नचाई ॥
सुर क्रुर इस लायक नाहीं, कहलद करे बड़ाई ॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे,
हरे रामा हरे रामा, रामा रामा हरे हरे ।
- Surdas.
- Chitra - Jagjit Singh.
- Jagjit Singh.
तप्त कोंचन गौरांगी राधे वृन्दावनेश्वरी,
वृषभान मुसुते देवी प्रणमामी हरे प्रिये ।
श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्यानंद,
श्री अद्वैत गदा-धर,
श्री वासादी गौर भक्त वृन्द ।
हरेरनाम हरेरनाम हरेरनामय केवलम्,
कलौ नास्तयव नास्तयव नास्तयव,
गति अन्यथा रूप ।
हे गोविन्द हे गोपाल, हे दयाल लाल ।
प्राण नाथ अनाथ सखे, दीन दर्द निहाल ।
हे समरथ अगम्य पूरण, मोह माया धार ।
अंध कूप महा भयान, नानक पार उतार ।
जय राधा माधव, जय कुँज बिहारी ।
जय गोपीजन वल्लभ, जय गिरिवर धारी ।
यशोदा नंदन ब्रजजन रंजन, जमुना तीर वनचारी ।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे,
हरे रामा हरे रामा, रामा रामा हरे हरे ।
दीनन दुःख हरण देव संतन हितकारी ॥टेक॥
दीनन दुःख हरण देव संतन हितकारी ॥टेक॥
अजामील गीध व्याध इनमें कहो कौन साध ।
पंछी को पद पढ़ात गणिका सी तारी ॥१॥
ध्रुव के सिर छत्र देत प्रह्लाद को उबार लेत ।
भगत हेतु बांध्यो सेतु लंकपुरी जारी ॥२॥
तंडुल देत रीझ जात सागपात सों अघात ।
गिनत नहीं जूठे फल खाटे मीठे खारी ॥३॥
गज को जब ग्राह ग्रस्यो दुस्सासन चीर खस्यो ।
सभाबीच कृष्ण कृष्ण द्रौपदी पुकारी ॥४॥
इतने में हरि आय गए बसनन आरुढ़ भये ।
सूरदास द्वारे ठाढ़ो आन्धरो भिखारी ॥५॥