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Jo Bhi Bura Bhala Hai Allaah Jaanata Hai. / जो भी बुरा भला है अल्लाह जानता है,

जो भी बुरा भला है अल्लाह जानता है,
बंदे के दिल में क्या है अल्लाह जानता है ।

ये फ़र्श-ओ-अर्श क्या है अल्लाह जानता है,
पर्दो में क्या छिपा है अल्लाह जानता है ।

जाकर जहाँ से कोई वापस नहीं है आता,
वो कौन सी जगह है अल्लाह जानता है ।

नेक़ी बदी को अपने कितना ही तू छिपाये,
अल्लाह को पता है अल्लाह जानता है ।

ये धूप छाँव देखो ये सुबह शाम देखो,
सब क्यूँ ये हो रहा है अल्लाह जानता है ।

क़िस्मत के नाम को तो सब जानते है लेकिन,
क़िस्मत में क्या लिखा है अल्लाह जानता है ।
  • Akhtar Shirani.
  • Jagjit Singh - Lata Mangeshkar.

Dhoop Mein Niklo Ghataon Mein Nahakar To Dekho. / धूप में निकलो घटाओं में नहाकर तो देखो,

धूप में निकलो घटाओं में नहाकर तो देखो,
ज़िन्दगी क्या है किताबों को हटाकर तो देखो ।

वो सितारा है चमकने दो यूँ ही आँखों में,
क्या जरूरी है उसे जिस्म बनाकर देखो ।

पत्थरों में ज़ुबान होती है दिल होते है,
अपनी घर की दर-ओ-दीवार सजाकर देखो ।

फ़ासिला नज़रों का धोखा भी तो हो सकता है,
वो मिले या ना मिले हाथ बढाकर देखो ।
  • Nida Fazli.
  • Jagjit Singh.

Gham Ka Khazana Tera Bhi Hai Mera Bhi. / ग़म का खज़ाना तेरा भी है मेरा भी,

ग़म का खज़ाना तेरा भी है मेरा भी,
ये नज़राना तेरा भी है मेरा भी ।

अपने ग़म को गीत बनाकर गा लेना,
राग पुराना तेरा भी है मेरा भी ।

तु मुझको और मैं तूझको समझाऊँ क्या,
दिल दीवाना तेरा भी है मेरा भी ।

शहर में गलीयाँ गलीयों जिसका चर्चा है,
वो अफ़साना तेरा भी है मेरा भी ।

मैख़ाने की बात न कर वाइज़ मुझसे,
आना जाना तेरा भी है मेरा भी ।
  • Shahid Kabir.
  • Jagjit Singh - Lata Mangeshkar.

Har Taraf Har Jagah Beshumar Aadmi. / हर तरफ़ हर जग़ह बेशुमार आदमी,

हर तरफ़ हर जग़ह बेशुमार आदमी,
फिर भी तन्हाईयों का शिकार आदमी ।

सुबहों से शाम तक बोझ ढोता हुआ,
अपनी ही लाश पर खुद मज़ार आदमी ।

हर तरफ भागते दौड़ते रास्ते,
हर तरफ आदमी का शिकार आदमी ।

रोज जीता हुआ रोज मरता हुआ,
हर नये दिन नया इंतज़ार आदमी ।

ज़िन्दगी का मुक़द्दर सफ़र-दर-सफ़र,
आख़िरी सांस तक बेक़रार आदमी ।
  • Nida Fazli.
  • Jagjit Singh - Lata Mangeshkar.

Kabhi Yun Bhi Aa Meri Aankh Mein Ki Meri Nazar Ko Khabar Na Ho. / कभी यूँ भी आ मेरी आँख में, कि मेरी नज़र को ख़बर ना हो,

कभी यूँ भी आ मेरी आँख में, कि मेरी नज़र को ख़बर ना हो,
मुझे एक रात नवाज़ दे, मगर उसके बाद सहर ना हो ।

वो बड़ा रहीम-ओ-करीम है, मुझे ये शिफ़त भी अता करे,
तुझे भूलने की दुआ करूँ, तो दुआ में मेरी असर ना हो ।

कभी दिन की धूप में झूम के, कभी शब के फूल को चूम के,
यूँ ही साथ साथ चलें सदा, कभी ख़त्म अपना सफ़र ना हो ।

मेरे पास मेरे हबीब आ, ज़रा और दिल के करीब आ,
तुझे धड़कनो में बसा लू मैं, के बिछड़ने का कभी ड़र ना हो ।
  • Bashir Badr.
  • Jagjit Singh.

Mausam Ko Isharon Se Bula Kyun Nahi Lete. / मौसम को इशारों से बुला क्यों नहीं लेते,

मौसम को इशारों से बुला क्यों नहीं लेते,
रूठा है अगर वो तो मना क्यों नहीं लेते ।

दिवाना तुम्हारा है कोई ग़ैर नहीं,
मचला भी तो सीने से लगा क्यों नहीं लेते ।

ख़त लिखकर कभी और कभी ख़त को जलाकर,
तन्हाई को रंगीन बना क्यों नहीं लेते ।

तुम जाग रहे हो मुझको अच्छा नहीं लगता,
चुपके से मेरी नींद चुरा क्यों नहीं लेते ।
  • Zafar Gorakhpuri.
  • Jagjit Singh.

Chaurahe Par Luta Cheer, Pyade Se Pit Gaya Vazeer. / चौराहे पर लुटा चीर, प्यादे से पिट गया वज़ीर,

अटल बिहारी वाजपेयी :- जो कल थे वे आज नहीं हैं, जो आज हैं कल नहीं होंगे, होने ना होने का क्रम यूँ ही चलता रहेगा, हम हैं हम रहेंगे, ये भ्रम भी सदा पलता रहेगा । सत्य क्या है, होना या न होना, या दोनो ही सत्य है, जो है उसका होना सत्य है, जो नहीं है, उसका न होना सत्य है । मुझे लगता है के होना ना होना, दोना एक ही सत्य के दो अयाम हैं, शेष सब समझ के भेद, बुद्धी के व्यायाम हैं ।

चौराहे पर लुटा चीर,
प्यादे से पिट गया वज़ीर,
चलूँ आख़री चाल के बाजी,
छोड़ विरक्ति रचाऊँ मैं,
राह कौन सी जाऊँ मैं ।

सपना जन्मा और मर गया,
मधु रितु में बाग झड़ गया,
तिनके बिखरे हुए बटोरूँ,
या नव सृष्टि सजाऊँ मैं,
राह कौन सी जाऊँ मैं ।

दो दिन मिले उधार में,
घाटे के व्यापार में,
क्षण-क्षण का हिसाब जोडू मैं,
या पूंजी शेष लुटाऊँ मैं,
राह कौन सी जाऊँ मैं ।
  • Atal Bihari Vajpayee.
  • Jagjit Singh.

Door Kahin Koi Rota Hai, Tan Par Pehra Bhatak Raha Mann. / दूर कहीं कोई रोता है, तन पर पैहरा भटक रहा मन,

अटल बिहारी वाजपेयी :- इमरजेन्सी के दौरान, जब मेरी तबीयत ख़राब हुई, तब मुझे बैंगलौर के जेल से ऑल इन्ड़िया मैड़िकल इन्सटीट्यूट में लाया गया । चौथी या पांचवी मन्ज़िल पर रखा गया था । कड़ा पहरा था । लेकिन रोज़ सवेरे मेरी आँख अचानक खुल जाती थी । कारण ये था कि रोने कि आवाज़ आती थी । मैंने पता लगाने का प्रयास किया, ये आवाज़ कहाँ से आ रही है, किसकी आवाज़ है, तो मुझे बताया गया कि मैड़िकल इन्सटीट्यूट में रात में जिन मरीजों का देहांत हो जाता है, घर वालों को उनकी लाश सवेरे दी जाती है । सवेरे उन्हें ये जानकारी मिलती है कि उनका प्रियजन नहीं रहा ।
रोने कि आवाज़ मुझे विचलित कर गई । दूर से आवाज़ आती थी मगर हृदय को चीर कर चली जाती थी ।

दूर कहीं कोई रोता है,
तन पर पैहरा भटक रहा मन,
साथी है केवल सूनापन,
बिछुड़ गया क्या स्वजन किसी का,
क्रंदन सदा करूण होता है ।

जन्म दिवस पर हम इठलाते,
क्यों ना मरण त्यौहार मनाते,
अन्तिम यात्रा के अवसर पर,
आँसू का अशकुन होता है ।

अन्तर रोयें आँख ना रोयें,
धुल जायेंगे स्वपन संजाये,
छलना भरे विश्व में केवल,
सपना ही सच होता है ।

इस जीवन से मृत्यु भली है,
आतंकित जब गली गली है,
मैं भी रोता आसपास जब,
कोई कहीं नहीं होता है ।
  • Atal Bihari Vajpayee.
  • Jagjit Singh.

Ek Baras Beet Gaya, Sharad Chandni Udaas. / जुलसाता जेठ मास, शरद चाँदनी उदास,

अटल बिहारी वाजपेयी :- इमरजेन्सी लगी थी । सारा देश एक जेल-ख़ाने में बदल दिया गया था । स्वतंत्रताओं का अपहरण हुआ था । बड़ी संख्या में लोग गिरफ़्तार किये गये थे । जेलों में बंद किये गये थे । जब एक साल बीत गया, तो मैंने एक छोटी सी कविता लिखी ।

जुलसाता जेठ मास, शरद चाँदनी उदास,
सिसकी भरते सावन का, अंतरघट बीत गया,
एक बरस बीत गया, एक बरस बीत बया ।

एक बरस बीत गया, एक बरस बीत गया,
जुलसाता जेठ मास, शरद चाँदनी उदास,
सिसकी भरते सावन का, अंतरघट बीत गया,
एक बरस बीत गया.................................

सिखचों में सिमटा जग, किन्तु विकल प्राण विहग,
धरती से अम्बर तक, गुंज मुक्ती गीत गाया,
एक बरस बीत गया.................................

पथ निहारते नयन, गिनते दिन पलछिन,
लौट कभी आयेगा, मन का जो मीत गया,
एक बरस बीत गया.................................
Atal Bihari Vajpayee.
Jagjit Singh.

Jeevan Beet Chala, Kal Kal Karte Aaj. / जीवन बीत चला, कल कल करते आज,

अटल बिहारी वाजपेयी :- मैंने बहुत कम कवितायें लिखी हैं । वक़्त नहीं मिलता, लेकिन जब कभी साल-गिरह आती है, तब पिछले कुछ सालों से मैं हर साल-गिरह पर एक कविता लिखता हूँ ।

जीवन की ढलने लगी साँझ,
उमर घट गयी, ड़गर कट गयी,
जीवन की ढलने लगी साँझ,
बदलें हैं अर्थ, शब्द हुए व्यर्थ,
शांत बिना खुशिया हैं बांझ,
जीवन की ढलने लगी साँझ ।

जीवन बीत चला, जीवन बीत चला,
कल कल करते आज,
हाथ से निकले सारे,
भूत भविष्य कि चिन्ता में,
वर्तमान कि बाज़ी हारे,
पहरा कोई काम ना आया,
रसघट रीत चला,
जीवन बीत चला, जीवन बीत चला ।

हानि लाभ के पलड़ों में,
तुलता जीवन व्यापार हो गया,
मोल लगा बिकने वाले का,
बिना बिका बेकार हो गया,
मुझे हाट में छोड़ अकेला,
एक एक कर मीत चला,
जीवन बीत चला, जीवन बीत चला ।
  • Atal Bihari Vajpayee.
  • Jagjit Singh.

Kadam Milakar Chalna Hoga. / कदम मिलाकर चलना होगा ।

अटल बिहारी वाजपेयी :- इमरजेंसी के बाद लोगो ने जनता पार्टी पर अपना विश्वास प्रकट किया था । जय प्रकाश जी हमारे नेता थे । उनके नेतृत्व में हमने राज-घाट पर जाकर शपथ ली थी, कि हम मिलकर चलेंगे, मिलकर देश का भला करेंगे । लेकिन ऐसा नहीं हुआ, जनता पार्टी टूट गयी, बिखर गयी । जय प्रकाश जी ने अपनी आँखों के आगे जनता पार्टी का दुर्घटन देखा । गाँधी के कारण राज-घाट पर जय प्रकाश जी के नेतृत्व में जो शपथ ली गयी थी, उसका हमने पालन नहीं किया, इसका हमें अफ़सोस रहेगा । उसी समय मैंने ये कविता लिखीं थी जो मेरी पीड़ा को थोड़ी मात्रा में व्यक्त करती हैं ।

क्षमा करो बापू तुम हमको,
वचन भंग के हम अपराधी,
राज-घाट को किया अपावन,
मंजिल भूले यात्रा आधी,
जय प्रकाश जी रखो भरोसा,
टूटे सपनो को जोड़ेंगे,
चिता भस्म कि चिंगारी से,
अंधकार की गड़ तोड़ेंगे ।

बाधायें आती हैं आयें,
गिरे प्रलय की घोर घटायें,
पाँवो के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसे यदि ज्वालायें,
निज हाथों से हँसते हँसते,
हाथ लगाकर जलना होगा,
कदम मिलाकर चलना होगा ।

हास्य रूदन में तूफ़ानों में,
अमर असंख्यक बलिदानो में,
उद्यानो में विरानो में,
अपमानो में सम्मानो में,
उन्नत मस्तक उभरा सीना,
पीड़ाओं में पलना होगा,
कदम मिलाकर चलना होगा ।

उजियारो में अंधकार में,
कल कछार में बीच धार में,
घोर घिनाने पूत प्यार में,
क्षणिक जीत में दीर्घ हार में,
जीवन के शत शत आकर्षक,
अरमानों को दलना होगा,
कदम मिलाकर चलना होगा ।
  • Atal Bihari Vajpayee.
  • Jagjit Singh.

Kya Khoya Kya Paaya Jag Mein, Milte Aur Bichadte Mag Mein. / क्या खोया क्या पाया जग में, मिलते और बिछड़ते मग में,

अमिताभ बच्चन :- ज़िन्दगी के शोर, राजनीत की अपाधापी, रिश्ते नातों कि गलियों और क्या खोया क्या पाया के बाज़ारों से आगे, सोच के रास्ते पर कहीं एक ऐसा नुक्कड़ आता है, जहाँ पहुँच कर इन्सान एकाकी हो जाता है । तब, जाग उठता है ‘कवि’ । फिर शब्दों के रंगो से जीवन की अनोखी तस्वीरें बनती है । कवितायें और गीत सपनों की तरह आते हैं, और कागज़ पर हमेशा के लिये अपने घर बना लेते हैं ।
        अटल जी की ये कवितायें ऐसे ही पल ऐसे ही क्षणों में लिखी गयी हैं, जब सुनने वाले और सुनाने वाले में, तुम और मैं की दीवारें टूट जाती हैं, दुनिया की सारी धड़कने सिमट कर एक दिल में आ जाती हैं, और कवि के शब्द दुनिया के हर सम्वेदनशील इन्सान के शब्द बन जाते हैं ।

क्या खोया क्या पाया जग में,
मिलते और बिछड़ते मग में,
मुझे किसी से नहीं शिक़ायत,
यद्दपि चला गया पग पग में,
एक दृष्टि बीती पर ड़ाले,
यादों की पोटली टटोले,
अपने ही मन से कुछ बोलें ।

पृथ्वी लाखों वर्ष पुरानी,
जीवन एक अनंत कहानी,
पर तन की अपनी सीमायें,
यद्दपि सौ श्रद्धों की वाणी,
इतना काफ़ी है अंतिम,
दस्तक पर ख़ुद दरवाज़ा खोलें,
अपने ही मन से कुछ बोलें ।

जन्म मरण का अविरत फ़ेरा,
जीवन बंजारों का ड़ेरा,
आज यहाँ कल कहाँ कुछ है,
कौन जानता किधर सवेरा,
अंधियारा आकाश असीमीत,
प्राणों के पंखों को तोले,
अपने ही मन से कुछ बोलें ।
  • Amitabh Bachchan.
  • Jagjit Singh.

Hey Ishwar Tu Jaane Yahan Kya Hai Kiska Shikhar. / हे ईश्वर तू जाने यहाँ क्या है किसका शिख़र ।

नीले नीले आसमान में तू है,
नाज़ुक सी कलियों में तू है,
धरती की हलचल में तू है,
जीवन के हर पल में तू है,
हे ईश्वर तू जाने यहाँ क्या है किसका शिख़र ।

तू है मन की शक्ति, आशा है सबकी, तू ही सबका साथी रे ।

सूरज की गर्मी में तू है,
हवाओं की नर्मी में तू है,
बहते हुए झरनों में तू है,
पंछी की उड़ानों में तू है,
आ सब ढूँढते हैं यहाँ अपना अपना शिख़र,
हे ईश्वर तू जाने यहाँ क्या है किसका शिख़र ।

तू है मन की शक्ति, आशा है सबकी, तू ही सबका साथी रे ।

मानव की हर सांस तू है,
पल पल की एक आस तू है,
सब दूर हैं पास तू है,
जब धूप हैं छाँव तू है,
हम पहचाने कैसे निराकार तेरा शिख़र,
हे ईश्वर तू जाने यहाँ क्या है किसका शिख़र ।
  • Jagjit Singh.

Pratham Suman Shri Ganesh. / प्रथम सुमन श्री गणेश,

प्रथम सुमन श्री गणेश, गौरी सुत प्रिय महेश,
प्रथम सुमन श्री गणेश, गौरी सुत प्रिय महेश ।

लम्बोदर भुज विशाल, कर त्रिशुल चंद्र भाल,
शोभित गल पुष्प माल, रक्त वसन जाको भेष,
प्रथम सुमन श्री गणेश, गौरी सुत प्रिय महेश ।

पूरण गुण गण निधान, सुर मुनी अश करत गान,
ब्रह्मानन्द चरण ध्यान, विघ्न हरो गज गणेश,
प्रथम सुमन श्री गणेश, गौरी सुत प्रिय महेश ।
  • Jagjit Singh.

Prathameshwara Ganadeeshwara. / प्रथमेश्वरा गणदीश्वरा,

प्रथमेश्वरा गणदीश्वरा, चिन्तामणी परमेश्वरा,
गणनाथ सुरमणी गणपति, हे लम्ब श्री लम्बोदरा ।

महाकाल हो लयताल हो, सुरछंद श्रुति अखिलेश्वरा,
संगीत में और गीत में, गतीमान हो पुरणेश्वरा,
गणनाथ सुरमणी गणपति, हे लम्ब श्री लम्बोदरा ।

शिवानंद हो आनंद हो, मंगलेश्वरा धुमेश्वरा,
विश्वेश्वरा सर्वेश्वरा, विद्यापती चित्तेश्वरा,
गणनाथ सुरमणी गणपति, हे लम्ब श्री लम्बोदरा ।
  • Jagjit Singh.

Jai Ganesh Jai Ganesh Deva. / जय गणेश जय गणेश देवा,

जय गणेश जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ।

अंधन को आंख देत कोढिन को काया,
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया ।

एकदंत दयावंत चारभुजा धारी,
माथे सिंदूर सोहे मूष की सवारी ।

सूर शाम शरण आयो सफल किजे सेवा,
सगर काम सिद्ध करे श्री गणेश देवा ।
  • Jagjit Singh.

Jai Jai Ganpati Bhaktan Hitkari. / जय जय गणपती भक्तन हितकारी ।

ॐ गं गणपतये नमः ।।
जय जय गणपती भक्तन हितकारी ।
भवानी नंदन सब दुख भंन,
पूरण करता कारज सारे,
जय जय गणपती भक्तन हितकारी ।
विघ्न विनाशक शुभ फल दायक,
मंगल मूर्ति अष्ट विनायक,
जय जय गणपती भक्तन हितकारी ।
सब सुख करता हर दुख हरता,
बुद्धि विधाता मंगल करता,
हे गणनायक सिद्धी विनायक,
भक्तजनो के तुम हो सहायक,
जय जय गणपती भक्तन हितकारी ।
  • Jagjit Singh.

Jai Ganesh Gananath Dayanidhi. / जय गणेश गणनाथ दयानिधी,

जय गणेश गणनाथ दयानिधी,
सकल विघ्न कर दूर हमारे ।

प्रथम धरे जो ध्यान तुम्हारो,
तिस के पूरण कारज सारे ।

लम्बोदर गज वदन मनोहर,
कर त्रिशुल परशु वर धारे ।

रिद्धी सिद्धी दो चंवर ढुलावे,
मूषक वाहन परम सुखारे ।

ब्रहमानंद सहाय करो नित,
भक्तजनो के तुम रखवारे ।
  • Jagjit Singh.

Ganpati Bappa Morya. / गणपति बप्पा मोरिया,

गणपति बप्पा मोरिया, मंगल मूरति मोरिया,
सिद्धी विनायक मोरिया, गिरिजा नंदन मोरिया ।

एकदन्त जय मोरिया, गौरिसुत जय मोरिया,
जय लम्बोदर मोरिया, अग्रदेव जय मोरिया ।

विघ्न विनाशक मोरिया, जय घुमेश्वर मोरिया,
गजानना जय मोरिया, विद्या वारिधि मोरिया ।

सुखकर्ता जय मोरिया, दुख हरता जय मोरिया,
कर्पा सिन्धु जय मोरिया, बुद्धी विधाता मोरिया ।

भवानी नंदन मोरिया, जय शिव नंदन मोरिया,
जय मोदक प्रिय मोरिया, अष्ट विनायक मोरिया ।
  • Jagjit Singh.

Gaayeeyae Ganpati Jagvandan. / गायीये गणपति जग वंदन,

गायीये गणपति जग वंदन, शंकर सुवन भवानी नंदन ।

सिद्धी सदन गजवदन विनायक, कृपा सिंधु सुंदर सब नायक,
शंकर सुवन भवानी नंदन, गायीये गणपति जग वंदन ।

मोदक प्रिय मुद मंगलदाता, विद्या वारिधी बुद्धी विधाता,
शंकर सुवन भवानी नंदन, गायीये गणपति जग वंदन ।

मांगत तुलसीदास कर जोड़े, बसहुँ राम सिय मानस मोरे,
शंकर सुवन भवानी नंदन, गायीये गणपति जग वंदन ।
  • Jagjit Singh.