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Yeh Kiska Tassavoor Hai Ye Kiska Fasaana Hai. / ये किसका तसव्वुर है ये किसका फ़साना है,

ये किसका तसव्वुर है ये किसका फ़साना है,
जो अश्क़ हैं आँखों में तसबीह का दाना है ।

जो उन पे गुज़रती है किसने उसे जाना है,
अपनी ही मुसीबत है अपना ही फ़साना है ।

आँखों में नमी सी है चुप चुप से वो बैठे हैं,
नाज़ुक सी निगाहों में नाज़ुक सा फ़साना है ।

ये इश्क़ नहीं आसान इतना तो समझ लिजिये,
इक आग का दरिया है और डूब के जाना है ।

या वो थे ख़फ़ा हमसे या हम हैं ख़फ़ा उनसे,
कल उनका ज़माना है आज अपना ज़माना है ।
  • Jigar Moradabadi.
  • Jagjit Singh.

Rukh Se Parda Utha Hai Zara Saqiya Bus Abhi Rang-E-Mehfil Badal Jaayega. / रूख़ से परदा उठा है ज़रा साकीया, बस अभी रंग-ए-महफ़िल

रूख़ से परदा उठा है ज़रा साकीया, बस अभी रंग-ए-महफ़िल बदल जायेगा,
है जो बेहोश वो होश में आयेगा, गिरनेवाला है जो वो सम्भल जायेगा ।


तुम तसल्ली ना दो सिर्फ़ बैठे रहो, वक़्त कुछ मेरे मरने का टल जायेगा,
क्या ये कम है मसीहा के रहने ही से, मौत का भी इरादा बदल जायेगा ।

तीर की जान हैं दिल, दिल की जान तीर है, तीर को ना यूँ खींचो कहा मान लो,
तीर खींचा तो दिल भी निकल आयेगा, दिल जो निकला तो दम ही निकल जायेगा।

इसके हँसने में रोने का अंदाज़ है, ख़ाक़ उड़ाने में फ़रियाद का राज़ है,
इसको छेड़ो ना ‘अनवर’ ख़ुदा के लिये, वर्ना बीमार का दम निकल जायेगा ।

  • Anwar Mirza Puri.
  • Jagjit Singh.
  • Complete Ghazal.


रूख़ से परदा उठा है ज़रा साकीया, बस अभी रंग-ए-महफ़िल बदल जायेगा,
है जो बेहोश वो होश में आयेगा, गिरनेवाला है जो वो सम्भल जायेगा ।


तुम तसल्ली ना दो सिर्फ़ बैठे रहो, वक़्त कुछ मेरे मरने का टल जायेगा,
क्या ये कम है मसीहा के रहने ही से, मौत का भी इरादा बदल जायेगा ।


तीर की जान हैं दिल, दिल की जान तीर है, तीर को ना यूँ खींचो कहा मान लो,
तीर खींचा तो दिल भी निकल आयेगा, दिल जो निकला तो दम ही निकल जायेगा।


मेरा दामन तो जल ही चुका हैं मगर, आँच तुम पर भी आये गंवारा नहीं,
मेरे आँसू ना पोंछो ख़ुदा के लिये, वर्ना दामन तुम्हारा भी जल जायेगा ।


फूल कुछ इस तरह तोड़ ऐ बागबाँ, शाख़ हिलने ना पाये ना आवाज़ हो,
वर्ना गुलशन पे रौनक ना फिर आयेगी, हर कली का दिल जो दहल जायेगा ।


मेरी फ़रियाद से वो तड़प जायेंगे, मेरे दिल को मलाल इसका होगा मगर,
क्या ये कम है वो बेनक़ाब आयेंगे, मरनेवाले का अरमाँ निकल जायेगा ।


इसके हँसने में रोने का अंदाज़ है, ख़ाक़ उड़ाने में फ़रियाद का राज़ है,
इसको छेड़ो ना ‘अनवर’ ख़ुदा के लिये, वर्ना बीमार का दम निकल जायेगा ।

Raat Khamosh Hai, Chand Madhosh Hai, Tham Lena Mujhe. / रात ख़ामोश है, चाँद मदहोश है, थाम लेना मुझे,

रात ख़ामोश है, चाँद मदहोश है,
थाम लेना मुझे, जा रहा होश है ।

मिलन की दास्ताँ, धड़कनों की ज़ुबाँ,
गा रही है ज़मीं, सुन रहा आस्माँ,
गुनगुनाती हवा, दे रही है सदा,
सर्द इस रात की, गर्म आग़ोश है ।

महकती ये फिज़ा, जैसे तेरी अदा,
छा रहा है रूह पर, जाने कैसा नशा,
झुमता है जहाँ, अजब है ये समां,
दिल के गुल्ज़ार में, इश्क़ पुरजोश है ।
  • Hari Ram Acharya.
  • Jagjit Singh.

Gum Sum Ye Jahan Hai Hum Dum Tu Kahan Hai. / गुमसुम ये जहाँ है, हमदम तू कहाँ है,

गुमसुम ये जहाँ है, हमदम तू कहाँ है,
ग़मज़दा हो गई ज़िन्दगी आ भी जा ।

रात बैठी है बाहें पसारे,
सिसकीयाँ ले रहे हैं सितारे,
कोई टूटा हुआ दिल पुकारे,
हमदम तू कहाँ है,
ग़मज़दा हो गई ज़िन्दगी आ भी जा ।

आज आने का वादा भुला कर,
ना उम्मीदी की आन्धी चलाकर,
आशियाना वफ़ा का जलाकर,
हमदम तु कहाँ है,
ग़मज़दा हो गई ज़िन्दगी आ भी जा ।
  • B.K.Puri.
  • Jagjit SIngh.

Bahut Khoobsurat Hai Aankhein Tumhari Agar Ho Inaayat.

बहुत ख़ूबसूरत है आँखें तुम्हारी,
अगर हो इनायत ऐ जाने मोहब्बत,
बना दीजिये इनको किस्मत हमारी ।

जो सबसे जुदा है वो अन्दाज़ हो तुम,
छुपा था जो दिल में वही राज़ हो तुम,
तुम्हारी नज़ाकत बनी जबसे चाहत,
सुकून बन गयी है हर एक बेक़रारी ।

ना थे जब तलक़ तुम हमारी नज़र में,
ना था चाँद शब में ना सूरज सहर में,
तुम्हारी इजाज़त तुम्हारी हुक़ूमत,
ये सारा गगन है ये धरती है सारी ।
  • Nida Fazli.
  • Jagjit Singh.

Benaam Sa Ye Dard Thehar Kyun Nahi Jaata Jo Beet.

बेनाम-सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता,
जो बीत गया है वो गुज़र क्यूँ नहीं जाता ।

सब कुछ तो है क्या ढूँढती रहती हैं निगाहें,
क्या बात है मैं वक़्त पे घर क्यूँ नहीं जाता ।

वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में,
जो दूर है वो दिल से उतर क्यूँ नहीं जाता ।

मैं अपनी ही उलझी हुई राहों का तमाशा,
जाते हैं जिधर सब मैं उधर क्यूँ नहीं जाता ।

वो नाम जो बरसो से ना चेहरा ना बदन है,
वो ख़्वाब अगर है तो बिखर क्यूँ नहीं जाता ।
  • Nida Fazli.
  • Jagjit Singh.

Teri Aankhon Se Hi Jaage Soye Hum Kab Tak Aakhir.

तेरी आँखों से ही जागे सोयें हम,
कब तक आख़िर तेरे ग़म में रोयें हम ।

वक़्त का मरहम ज़ख़्मों को भर देता है,
शीशे को भी ये पत्थर कर देता है,
रात में तुझको पायें दिन में खोयें हम ।

हर आहट पर लगता है तू आया है,
धूप है मेरे पीछे आगे साया है,
खुद अपनी ही लाश को कब तक ढोयें हम ।
  • Nida Fazli.
  • Jagjit Singh.

Yun To Guzar Raha Hai Har Ik Pal Khushi Ke Saath.

यूँ तो गुज़र रहा है हर एक पल खुशी के साथ,
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ ।

रिश्ते वफ़ायें दोस्ती सब कुछ तो पास है,
क्या बात है पता नहीं दिल क्यूँ उदास है,
हर लम्हा है हसीन नई दिल कशी के साथ,
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ ।

चाहत भी है सुकुन भी है दिलबरी भी है,
आँखों में ख़्वाब भी है लबों पर हँसी भी है,
दिल को नहीं है कोई शिकायत किसी के साथ,
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ ।

सोचा था जैसा वैसा ही जीवन तो है मगर,
अब और किस तलाश में बेचैन हैं नज़र,
कुदरत तो मेहरबान है दरियादिली के साथ,
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ ।
  • Nida Fazli.
  • Jagjit Singh.