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दिल में अब दर्द-ए-मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं,
ज़िन्दगी मेरी इबादत के सिवा कुछ भी नहीं ।
मैं तेरी बारगह-ए-नाज़ में क्या पेश करूँ,
मेरी झोली में मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं ।
ऐ ख़ुदा मुझसे ना ले मेरे गुनाहों का हिसाब,
मेरे पास अश्क़-ए-नदामत के सिवा कुछ भी नहीं ।
वो तो मिट कर मुझे मिल ही गयी राहत वरना,
ज़िन्दगी रंज-ओ-मुसीबत के सिवा कुछ भी नहीं ।
- Sahir Bhopali.
- Lata Mangeshkar.
ग़म का खज़ाना तेरा भी है मेरा भी,
ये नज़राना तेरा भी है मेरा भी ।
अपने ग़म को गीत बनाकर गा लेना,
राग पुराना तेरा भी है मेरा भी ।
तु मुझको और मैं तूझको समझाऊँ क्या,
दिल दीवाना तेरा भी है मेरा भी ।
शहर में गलीयाँ गलीयों जिसका चर्चा है,
वो अफ़साना तेरा भी है मेरा भी ।
मैख़ाने की बात न कर वाइज़ मुझसे,
आना जाना तेरा भी है मेरा भी ।
- Shahid Kabir.
- Jagjit Singh - Lata Mangeshkar.
हर तरफ़ हर जग़ह बेशुमार आदमी,फिर भी तन्हाईयों का शिकार आदमी ।सुबहों से शाम तक बोझ ढोता हुआ,अपनी ही लाश पर खुद मज़ार आदमी ।हर तरफ भागते दौड़ते रास्ते,हर तरफ आदमी का शिकार आदमी ।रोज जीता हुआ रोज मरता हुआ,हर नये दिन नया इंतज़ार आदमी ।ज़िन्दगी का मुक़द्दर सफ़र-दर-सफ़र,आख़िरी सांस तक बेक़रार आदमी ।- Nida Fazli.
- Jagjit Singh - Lata Mangeshkar.
कभी यूँ भी आ मेरी आँख में, कि मेरी नज़र को ख़बर ना हो,मुझे एक रात नवाज़ दे, मगर उसके बाद सहर ना हो ।वो बड़ा रहीम-ओ-करीम है, मुझे ये शिफ़त भी अता करे,तुझे भूलने की दुआ करूँ, तो दुआ में मेरी असर ना हो ।कभी दिन की धूप में झूम के, कभी शब के फूल को चूम के,यूँ ही साथ साथ चलें सदा, कभी ख़त्म अपना सफ़र ना हो ।मेरे पास मेरे हबीब आ, ज़रा और दिल के करीब आ,तुझे धड़कनो में बसा लू मैं, के बिछड़ने का कभी ड़र ना हो ।- Bashir Badr.
- Jagjit Singh.
मौसम को इशारों से बुला क्यों नहीं लेते,
रूठा है अगर वो तो मना क्यों नहीं लेते ।
दिवाना तुम्हारा है कोई ग़ैर नहीं,
मचला भी तो सीने से लगा क्यों नहीं लेते ।
ख़त लिखकर कभी और कभी ख़त को जलाकर,
तन्हाई को रंगीन बना क्यों नहीं लेते ।
तुम जाग रहे हो मुझको अच्छा नहीं लगता,
चुपके से मेरी नींद चुरा क्यों नहीं लेते ।
- Zafar Gorakhpuri.
- Jagjit Singh.